1 मई से जनता को मिलेगा समस्याओं के समाधान का अधिकार : नीतीश

पटना. लोगों को शिकायतों व समस्याओं के समाधान का अधिकार 1 मई से मिल जाएगा। लोग समस्याओं की अनदेखी करने वाले सरकारी सेवक के खिलाफ आवेदन देंगे व जांच के बाद दोषी के खिलाफ जुर्माना से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होगी। सीएम ने सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात कही।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोक शिकायत निवारण अधिकार नियमावली 2015 पर सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार एक पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन देखा। अभी लोगों को आवेदन देने का अधिकार तो है लेकिन कुछ चुनिंदा मामलों में ही समय सीमा के भीतर शिकायतों का निपटारा हो पाता है।
एक मई से जन शिकायतों की अनदेखी करने वाले सरकारी बाबुओं पर सख्ती हो सकेगी। अगस्त में विधान मंडल से इससे संबंधित विधेयक को मंजूरी दे दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमावली के संबंध में सभी स्तर पर अफसरों का प्रशिक्षण होना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आवेदन प्राप्त करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
आवेदन का फार्म सरलतम होना चाहिए। ताकि आम आदमी को आवेदन करने में परेशानी न हो। राज्य स्तर पर कॉल सेंटर से शिकायत लेने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को जिलाधिकारियों के साथ होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में लोक शिकायत निवारण अधिकार नियमावली को अनिवार्य रूप से शामिल करने को कहा। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डी.एस. गंगवार, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी, लोक शिकायत सचिव डॉ.एस.सिद्धार्थ और प्रशासनिक सुधार मिशन के प्रशासनिक पदाधिकारी संदीप शेखर प्रियदर्शी मौजूद थे।
नियमावली में खास 
>फोन पर भी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे लोग।
>हरेक शिकायत या आवेदन का डॉक्यूमेंटेशन।
>दोषी अधिकारियों की बर्खास्तगी का भी प्रावधान।
>इस कानून के तहत कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती नहीं।
>लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, प्रथम और दूसरे अपीलीय प्राधिकार को सिविल कोर्ट की शक्ति।
कार्रवाई का फाॅर्मूला
>सबसे पहले लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास शिकायत।
>यहां से असंतुष्ट होने पर 30 दिनों में प्रथम अपीलीय प्राधिकार में अपील।
>प्रथम अपीलीय प्राधिकार के निर्णय को 30 दिनों में दूसरे अपीलीय प्राधिकार में चुनौती दी जा सकेगी।
>दूसरा अपीलीय प्राधिकार भी 30 दिनों में अपील का निपटारा करेगा।
>उसे 500 से 5000 जुर्माना व दोषी अफसर पर कार्रवाई की सिफारिश का अधिकार।
>दोषी सरकारी सेवक को 75 दिनों में पुनर्विचार आवेदन देने का अधिकार।

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