सूर्य जहां से उगते हैं उसे ही पूर्व दिशा समझें:आचार्य देवप्रकाश श्रोत्रिय

20180326_212904आर्य समाज में परिचर्चा में उमड़ी भीड़

सूर्य हमेशा अपनी मर्जी से उगते हैं।उन्हें दिशा की जरूरत नहीं है।वे जहां से उगते हैं पूर्व दिशा उसे ही समझना चाहिए।सूर्य की महिमा का बखान करते हुए दिल्ली से आए आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय ने सोमवार को आर्य समाज परिसर मे यह बातें कहीं।उन्होंने वैदिक सृष्टि की वैज्ञानिकता विषय पर प्रकाश डाला तथा सूर्य, पृथ्वी, आकाश गंगा के बीच समन्वय पर लोगों को रूबरू कराया।उन्होंने जीवन की सूक्ष्म चीजों को विस्तार से बताया।तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने आर्य समाज की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।जबकि रामचंद्र सिंह क्रांतिकारी ने आर्य समाज के बारे मे विस्तृत वर्णन किया। वहीं उत्तरप्रदेश से आए आचार्य प्रदीप शास्त्री ने सुंदर भजनों से लोगों का मन मोह लिया।मौके पर आर्य समाज के भरत प्रसाद आर्य, प्रो रमाशंकर प्रसाद,सुशील सिकरिया, प्रेम नाथ गुप्ता, ईश्वर चंद्र, रजनीश प्रियदर्शी सहित सभी गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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