शौचालय निर्माण की राशि केंद्र सरकार ने घटाई, बिहार पर 3300 करोड़ का बोझ

पटना. शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाले केद्रांश में कटौती की गई है। इसका सीधा असर राज्य के खजाने पर पड़ेगा। हर घर में शौचालय निर्माण वाली योजना को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 3300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। हर घर में शौचालय का निर्माण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में से एक है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग इस योजना हर हाल में पूरा करने की रणनीति बना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का जमकर प्रचार-प्रसार किया गया। प्रधानमंत्री खुद खुले में शौच प्रथा को बंद करने की बात करते रहे हैं। लेकिन, भारत सरकार ने इस मद में मिलने वाली केंद्रीय राशि में कटौती कर दी है। नई नीति बनाने से पहले शौचालय निर्माण के लिए केंद्र सरकार 75 फीसदी और राज्य सरकार सरकार 25 फीसदी राशि देती रही है। उसके बाद भी राज्य सरकारों को इसे पूरा करने में परेशानी हो रही थी। अब तो केंद्र सरकार केवल 60 फीसदी राशि ही देगी।
चाहिए 22000 करोड़
राज्य में 1.64 करोड़ शौचालय का निर्माण किया जाना है। इसके लिए राज्य सरकार को लगभग 22 हजार करोड़ की दरकार है। पुरानी व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार 16612 करोड़ देती और बाकी की राशि राज्य सरकार देती, लेकिन नई व्यवस्था में केंद्र सरकार ने राशि में कटौती कर के 13298 करोड़ कर दी और राज्य सरकार को 8865 करोड़ देना पड़ेगा। इस तरह राज्य पर 3300 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
केंद्र सरकार से की थी 90:10 के अनुपात में राशि देने की मांग 
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शौचालय निर्माण के लिए राशि में की गई कटौती का विरोध करते हुए इससे 90:10 के अनुपात में करने की मांग केंद्र सरकार से की थी। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को नीति आयोग द्वारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी के समाने उठाते हुए कहा था कि नई व्यवस्था बिहार जैसे राज्यों के लिए उचित नहीं है। इसका असर खुले में शौच प्रथा को खत्म करने पर पड़ेगा।
फंड की समस्या नहीं आएगी: मंत्री
हर घर में शौचालय का निर्माण करवाना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में से एक है। इससे पूरा करने के लिए विभाग रणनीति बना रहा है। इस योजना को पूरा करने में फंड की समस्या नहीं आएगी। – कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री

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