रक्सौल के लाल की लिखी पुस्तक ने ऑनलाइन मार्केटिंग में धमाल मचाया

56रक्सौल डेली : शहर के टुमडिया टोला नया बस्ती निवासी ओम प्रकाश उपाध्याय के पुत्र नितिन उपाध्याय ने अपनी पुस्तक  लिख शहर का नाम रौशन किया है .नितिन पढाई के दौरान ही कुछ करने की ठान ली थी .प्रतिभावान नितिन  की प्राथमिक शिक्षा रक्सौल शहर के डंकन एकेडमी से हुई ,जिसके बाद उच्च शिक्षा के लिए केरल चले गए. जहां उन्होंने केरल  विश्वविद्यालय-विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) से  मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक की पढाई पूरी की  .वह एक प्रेरक इंजीनियर के साथ साथ  आईआरजेईटी पत्रिका में शोधकर्ता, एक लेखक, यात्रा लेखक, प्रेरक वक्ता भी है . वहीं  अखरोट स्कूल में प्रबंध निदेशक विचारों का नितिन ने आईआईटी-मद्रास, जेएनटीयू-हैदराबाद, सीबीआईटी-हैदराबाद, आईएफईईएल-लोनावाला, वीआईटी-वेल्लोर इत्यादि में अपने प्रेरक भाषण दिए हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग के अपने तीसरे वर्ष में अपना लेखन कौशल विकसित किया और  इसे निरंतर जारी रखना चाहते है .  हालहिं मे उनके दवरा लिखित पुस्तक पाटलिपुत्रा से मडगांव प्रकाशित हुयी है .उनका मानना है  कि  समर्पण और कड़ी मेहनत से किया गया कार्य से  कुछ भी प्राप्त कर सकता है।उनके दवरा लिखी पुस्तक आज के समय मे फ्लिप्कार्ट ,अमेजन था अन्य ऑन्लाइन  साइटों पर  धमाल मचा रही है .जिसे पाठकों ने काफी सराहा है .

कहानी  का  सारांश

यह एक अनूठी प्रेम कहानी है  जिसे आम तौर पर भारत में लिखा जाता है। यह इस विषय के साथ विनोदी पात्रों का एक गुच्छा है जिसमें प्रेम, रोमांस, वासना, दिल की धड़कन, परेशानी, निराशा, कल्पनाएं और शिक्षाएं शामिल हैं। पतलीपुत्र से मडगांव तक, भोजपुरी युवा वयस्क की यात्रा जो सोशल मीडिया पर अपना प्यार पाती है। यह उपन्यास 21 वीं शताब्दी में बदलाव की नई निश्चितता के भीतर संबंध को परिभाषित करने की कोशिश कर प्यार की जटिल दुनिया में आता है। ‘पटलिपुत्र से मडगांव’ तक एक त्वरित पठन, दो दोस्तों, एक मंगेतर, एक ऑनलाइन दुल्हन और वासना, रोमांस, और दिल की धड़कन की एक विनोदी स्थिति के तहत तलाक लाता है। “बढ़ते टेलीफोन-बिल, गलतफहमी, मिस्ड उड़ानें और ‘हमेशा के लिए अकेले’ हनीमून” यह पुस्तक आधुनिक युग में रिश्तों और वैश्वीकरण की एक विनोदी कहानी है जो आज तक नहीं लिखी गई है। यह प्रेम कहानी निश्चित रूप से हमारे लिए एक आंख खोलने वाला है युवा पीढ़ी के बहुत सारे अनुभव और शिक्षा के साथ।

मेरे रक्सौल  के छात्रों को संदेश

ऐसा मत सोचो कि आप एक पिछड़े शहर से हैं जहां संसाधनों की कमी है, कोई अच्छा सीखने का माहौल नहीं है, इसके बजाय आपको अपने आप में दृढ़ विश्वास होना चाहिए, आत्मविश्वास, हमेशा कुछ सीखने और अधिक रचनात्मक और व्यावहारिक होने के लिए उत्सुक रहें। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया पर अपना बहुमूल्य समय बर्बाद न करें इससे आपको कुछ भी नहीं मिलेगा। यदि आप समर्पित दुनिया के साथ पर्याप्त मेहनत करते हैं तो इस दुनिया में कुछ भी हासिल किया जा सकता है

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