मधेसी आन्दोलन से रक्सौल का व्यापार चौपट

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बिगत 123 दिनों से चले आ रहे मधेश आन्दोलन से व्यापार पर खासा असर पड़ा है जिससे रक्सौल सहित भारत -नेपाल स्थित छोट बड़े शहरों की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है आन्दोलन से मंदा पड़े बाजार के कारन सीमाई इलाकों में रूपयें  नहीं आ रहे है भारत और नेपाल के सीमाई क्षेत्रों में बसे बाजारों का तकरीबन अधिकांश लेन देन नेपाल पे निर्भर है जिसको लेकर व्यापारी खासा चिंतित है रेडिमेड ,कपड़ा  ,किराना व्यापारियो के अनुसार दैनिक उपभोग में ली जानेवाली वस्तुओं के बिक्री पर भी लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई  है किराना एवं श्रृंगार सामग्री नेपाल की अपेक्षा भारत में ही सस्ते  है जिसके वजह से नेपाल के बीरगंज से लेकर आस पास के इलाके के लोग भारतीय सीमा स्थित बाजारों में आते है लेकिन मधेश आन्दोलन की वजह से बाजारों में लोगों के अवागमन पर भी असर पड़ा है |

भारत नेपाल को जोडनेवाली सीमाओं में रक्सौल सबसे अहम सीमा है अंतराष्ट्रीय सीमा रक्सौल से प्रतिदिन हजारों  की संख्या में ट्रकें जाती है पेट्रोलियम एवं ईंधन के दुलाई परिवहन एवं सुरक्षा के  दृष्टिकोण से भी  रक्सौल सीमा सबसे अहम है लेकिन मधेशियों के द्वारा भारत और नेपाल को जोड़नेवाली भारत -नेपाल  मैत्री पुल पे बीते 165 दिनों से  टेंट लगा कर धरना दे रहे है जिसके वजह से ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक स्थित भी दयनिये हो गई है

भारतीये बाजारों में नेपाली रूपयें के मुल्य में भी गिरावट आई  है  पहले 160 रूपये एन .सी (नेपाली करेंसी )का मूल्य भारतीय 100 रूपये के बराबर होता था लेकिन अभी के समय में भारतीय बाजारों में नेपाली करेंसी का 10 प्रतिशत तक अवमूल्यन होगया है  जिसको लेकर लेन-देन काफी प्रभावित हुआ है अगर यही स्थिति रही तो व्यापारी रक्सौल से पलायन करने को विवश हो जायेंगे |

 

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