नेपाली पुलिस से गुरिल्ला युद्ध की तैयारी में मधेस आंदोलनकारी, माओवादी दे रहे हैं ट्रेनिंग

मुजफ्फरपुर. नेपाली पुलिस की गोली से बार-बार जख्मी हो रहे मधेसी आंदोलनकारी नेपाली पुलिस से छापामार जंग की तैयारी में हैं। एक सप्ताह से 40 से 45 मधेसी नेपाल के परसा जिले के पखा बस्ती में हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। नेपाली माओवादी संगठन से जुड़े ट्रेनर आर्म्स की ट्रेनिंग मधेसियों को दे रहे हैं। इससे भारत की सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक मधेसियों के पास अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं। हालांकि, उनके पास कुछ छोटे हथियारों के साथ कई एसएलआर हैं। बताया जाता है कि ट्रेनिंग के दौरान एसएलआर चलाने पर ज्यादा फोकस है।
ट्रेनिंग लेने वालों में कम उम्र के लड़के ज्यादा
बता दें कि मधेसी तीन महीने से अपने हक के लिए नेपाली पुलिस और सरकार से लड़ रहे हैं। कई बार नेपाली पुलिस से मधेसियों की सीधी भिड़ंत हो चुकी है। कई मधेसियों की जान तक जा चुकी है। सिक्युरिटी एजेंसी के एक सूत्र का कहना है कि माओवादियों की ओर से मधेसियों को समर्थन देने की जानकारी मिली है। जो लड़के ट्रेनिंग ले रहे हैं, उनमें कुछ तो काफी कम उम्र के हैं।
नेपाल में बढ़ा संकट
उधर, वीरगंज में आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच एक बार फिर भिड़ंत हो गई। पुलिस फायरिंग में कई प्रदर्शनकारियों के जख्मी होने की खबर है। वहीं, सुपौल में नेपाली तस्करों एसएसबी जवानों में फायरिंग की घटना के बाद पेट्रोलियम की कालाबाजारी का दबाव रक्सौल बॉर्डर पर बढ़ गया है। एक दिन में एक बाइक सवार 8 से 10 चक्कर लगा रहा है। एसएसबी का कहना है कि बाइक की टंकी में पेट्रोल ले जाने पर रोक नहीं है।
कौन हैं मधेसी 
मधेसी मुख्य रूप से नेपाली निवासी हैं, जो नेपाल के दक्षिणी भाग के मैदानी इलाकों में रहते हैं। इस क्षेत्र को ‘तराई क्षेत्र’ और ‘मधेस’ भी कहते हैं। यहां की जमीन उपजाऊ है और आबादी भी घनी है। मधेसियों का आरोप है कि नेपाल सरकार उन पर ध्यान नहीं देती।
गुस्से में क्यों है मधेसी
नेपाल में मधेसियों की संख्या सवा करोड़ से ज्यादा है। इनकी बोली मैथिली है। ये हिंदी और नेपाली भी बोलते हैं। भारत से इनका हजारों साल पुराना रिश्ता है, लेकिन इनमें से 56 लाख लोगों को अब तक नेपाल की नागरिकता नहीं मिल पाई है। जिन्हें नागरिकता मिली भी है, वे किसी काम की नहीं है। उन्हें सरकारी नौकरी भी नहीं मिलती। इसी भेदभाव के खिलाफ मधेसी आंदोलन कर रहे हैं।

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