चार हाथ होते ही दिल से निकली आवाज अब और नहीं शराब

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विशेष रिपोर्ट 💐 रक्सौल से मनीष सिंह 💐

पिछले कई दिनों से ठण्ड व कोहरे की चादर में लपेटे रकसौल की फिजां को सुबह सबेरे सूर्य की लालिमा भरी रौशनी मिली तो ऐसा लगा कि प्रकृति की ओर से विशेष संदेश मिलनेवाला है।इन दिनों अमूमन दस बजे तक चाय पर लोग मुलायम -अखिलेश प्रकरण की चर्चा करते रहते पर आज सुबह की बेला में सड़कों पर सन्नाटा रहा।जैसे ही दस बजा कि सड़कों पर आवाजाही बढ़ने लगी ।प्रशासन ,मीडियाकर्मी ,पार्टी कार्यकर्ता, स्कूली बच्चे व शिक्षक अपने अपने ढंग से तैयारी के साथ सड़क पर उतरने लगे।इस दौरान न तो बिरोध की बातें न ही किसी को कोसने की बात हुई।सबने एक साथ समाज हित में व बिहार से शराब की बिदाई के लिए अपने मन की बात पर मुहर लगा दी।और फिर जिसे जहां जगह मिली लाइन में खड़े होकर अपने दोनों हाथों को चार हाथों में तब्दील कर दिए।
यूं तो सरकारें बनती हैं गिरतीं हैं और कुछ अपने कार्यकाल पूरा भी कर लेतीं है।और जनहित में किया हुआ कार्य को याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती।बिहार में नीतीश कुमार की सरकार की दो चीजें शायद कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे। इनमे कई लाख शिक्षकों का नियोजन व शराबबंदी को लेकर मानव श्रृंखला इतिहास के पन्नो पर लिख दिए जाएंगे।आप मानें या न मानें बिहार में शराबबंदी नीतीश सरकार के लिय हिम्मत भरा कदम है। विकास व स्पेशल पैकेज को लेकर मारामारी के बीच शराब का न बिकना राज्य के आर्थिक विकास के लिए चुनौती भरा हैं।फिर भी नीतीश सरकार ने जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से कर्तव्यों का निर्वहन किया।इतना ही नही मार्च के बाद शराब से जुड़ी फैक्ट्रियों का कैबिनेट की बैठक में लाइसेंस का रिनिवल नहीं करना सचमुच साहसिक कदम है ।बिहार में शराबबंदी पर तरह तरह की बातें हुई पर यह फैसला कितना सुखद है यह उनसे पूछा जाए जिनके घर में एक शराबी है।इतना तय है कि शराब छोड़ने से सेहत और परिवार दोनों को लाभ है।बहरहाल कमियां तो हम सबों में है पर शराबबंदी के लिए नीतीश कुमार हमेशा जाने जाएंगें ।मानव श्रृंखला ने साबित कर दिया कि बिहार की जनता जनहित मामले में उनके साथ है।

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